Cinema of the Week-SEEMA (1955) by Anil Barthwal

सप्ताह की फिल्म : सीमा 1955
सुप्रभात मित्रो , इस फिल्म के सन्दर्भ में मैं कुछ लिखू इससे पहले में एक किस्से का जिक्र ज़रूर करना चाहूगा बात उनदिनों की है जब मैं करीब 8 वर्ष का रहा होगा , मै अपने मित्रो के साथ रामलीला के दिनों में आक्सर रामलीला देखने जाते थे और उस रामलीला में एक द्रश्य आता था जिसमे भगवान राम सीताजी को ढूँढ़ते हुए वन में भटक रहे है और एक गीत गाते हुए अपनी व्यथा सुना रहे है और कह रहे है की कहाँ जा छुपी है तू जनक की दुलारी तरसता भटकता मैं तेरा पुजारी | इस गीत की धुन ने मुझे इतना प्रभावित किया था की मैं अक्सर इसका जिक्र अपने मित्रो के बीच करता रहता था और इसी द्रश्य को देखने के लिए मैं लगातार दो तीन वर्षो तक रामलीला जाता रहा | बाद में जब मैंने तीन चार साल बाद सीमा फिल्म देखी और ” कहाँ जा रहा है तू ए जाने वाले अँधेरा है मन का दिया तो जला ले” गीत सुना तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा अरे यह तो वही धुन है जो मैंने रामलीला में सुनी थी | तो दोस्तों सीमा फिल्म का संगीत इतना महान था की उसने एक बालक के मन को इतना छू लिया था कि वह गीत उसके दिल में हमेशा के लिए अपनी जगह बना गया |
सीमा फिल्म के निर्माता , निर्देशक , कहानीकार और पटकथा लेखक थे अमिया चकवर्ती जी जिन्होंने पतिता जैसी सफल फिल्म बनायीं थी | सीमा एक बेहतरीन साहित्यिक फिल्मो में से एक थी जिसके गीतऔर संगीत अपने आप में एक इतिहास है जिसे अब न कभी लिखा जा सकेगा और न ही किया जा सकेगा | सीमा फिल्म हर तरह से एक सर्वश्रेष्ट फिल्म थी जिसे हम आज भी देखना चाहेगे |

Anil Barthwal's photo.
Anil Barthwal's photo.
Anil Barthwal's photo.
Anil Barthwal's photo.
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s